Wednesday 25 September 2013

Ego

Photo: वैराग्य -४-

वैराग्य का महत्व

योगदर्शन में यतमान, व्यतिरेक, एकेन्द्रिय और वशीकार भेद से वैराग्य की चार संज्ञाएँ टीकाकारों ने बतलाई हैं, उसकी विस्तृत व्याख्या भी की है | वह व्याख्या सर्वथा युक्तियुक्त और माननीय है | तथापि यहाँ संक्षेपसे अपनी साधारण बुद्धि के अनुसार वैराग्य के कुछ रूप बतलाने की चेष्टा की जाती है, जिससे सरलतापूर्वक सभी लोग इस विषय को समझ सके !

भय से होने वाला वैराग्य-संसार के भोग भोगनेसे परिणाम में नरक की प्राप्ति होगी | क्योकि भोग में संग्रह की आवश्यकता है, संग्रह के लिए आरम्भ आवश्यक है, आरम्भ में पाप होता है, पाप का फल नरक या दुःख है | इस तरह भोग के साधन में पाप और पाप का परिणाम दुःख समझकर उसके भय से विषयों से अलग होना भय से उत्पन्न वैराग्य है |

विचार से होने वाला वैराग्य-जिन पदार्थों को भोग मान उनके सन्ग से आनन्द की भावना की जाती है, जिनकी प्राप्ति में सुख की प्रतीति होती है, वे वास्तव में न भोग है, न सुख के साधन, न उनमे सुख है | दुखपूर्ण पदार्थों में-दुःख में है अविचार से सुख की कल्पना कर ली गयी है | इसीसे वे सुखरूप भासते है, वास्तव में तो दुःख या दुःख के ही कारण है |

भगवान के कहा है :

ये हि संस्पर्शजा भोगा दुखःयोनय एव ते |

अधान्तवन्त कौन्तेय न तेषु रमते बुध: || (गीता ५|२२)

‘जो ये इन्द्रिय तथा विषयों के संयोग से उत्पन्न होनेवाले सब भोग है, वे यदपि विषयी पुरुषों को सुखरूप भासते हैं तो भी निस्सदेह दुःख के ही हेतु है और आदि-अन्तवाले अर्थात् अनित्य है, इसलिए हे अर्जुन ! बुद्धिमान पुरुष उनमे नहीं रमता |’ अनित्य न हो तो इनको क्षणभंगुर समझकर सहन करना चाहिये | 


Om Namah Shivay

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Ego : 

Ego is the subtlest enemy of the soul. When we are under the influence of ego we are totally disconnected from self-respect; we fabricate and identify ourselves with false self-image. An egoistic person always feels insecure and seeks attention. It is said – if it hurts, it is ego. An egoist is in delusion, always influenced by praise and defamation. Ego isolates a person and creates clashes, discord, hatred and blind competition.

When we violate ourselves, we are violating eternal spiritual laws that are needed to sustain peace and harmony in this world. The Supreme Soul, the ocean of knowledge, purity, peace, love, happiness and power, recreates and reestablishes a new world order and culture of ‘ahimsa’ as the supreme dharma and way of life. Violence can be eliminated when we follow spiritual principles to become vice-less through Rajyoga which is a spiritual process of intellectual communion with the Supreme.

Om Namah Shivay

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